Monday, 11 April 2016

नागा साधू "हथियारबंद सैना" सन 800

सन 800 के लगभग जब हिन्दू धर्म पर संकट आया था तो हिन्दुओं ने हर घर से अपना "एक बेटा" धर्म की रक्षा के लिए त्याग किया था और उसी से ये धर्म रक्षक सैना "नागा साधू" "हथियार बंद" खड़ी हुई थी। ये भजन करने वाले साधू नही होते थे। हाँ, शांतिकाल में भक्ति करते थे।

और सुनो ये लोग "कल तक" यानि "तथकथित आजादी" के बाद तक "हथियारबंद सैना" ही थे।
इन लोगो को उल्लू बना कर और "कपट" करके "नेहरु" ने इन से "हथियार" रखवाये दिए थे।
1952 में तत्कालीन PM नेहरू ने हरिद्वार में "हिन्दू धर्म संसद" में सभी अखाडा प्रमुखों एवं शंकराचार्यों को आश्वाशन दिया कि हिन्दू बहुल राष्ट्र भारत में हिन्दू हितों से कोई समझौता नहीं किया जायेगा।
अतः सभी अखाड़े के सन्यासी अब शस्त्र का त्याग कर दें। जो की उनका एक हिंदुत्व विरोधी षड़यंत्रकारी प्रपंच था।
नेहरु ने इनको कहा अब देश "आजाद" हो गया है इसलिए अब धर्म को कोई "खतरा" नही है और आप को भी अब "हथियार" रखने की जरूरत भी नही है। तब से धर्म की क्या हालत है। शायद ये समझना आप के बस की बात नही।
लोग चाहे जैसे भगवान के फोटो बना देते है।
चाहे जैसे भगवान के बारे में बोल देते है, भगवान पर चाहे जैसी "फिल्मे" बना देते है। क्योंकि "धर्म की रक्षा" हो ही-नही रही है।
अपना कोई विद्वान को गुरु बनाओ ताकि आप की सोच को सही दिशा मिले।अपने ज्ञान के दायरे को विकसित करो।
धर्म ही देश का प्राण होता है,
अगर एक धर्म के नाम पर "यहूदी" एक नही होते तो आज "इजराईल" का नाम निशान भी ना होता।
अगर उस संकट की घड़ी में -हर हिन्दू ने अपने अपने घर से अपना बेटा नही दिया होता तो,
आज इस स्थान--पर ये देश तो होता --पर--शायद--आप और हम नही होते। 


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